यहाँ मैं कुछ ऐसे शब्दों का जिक्र कर रहा हूँ, जिन्हें अकसर आपने सुना होगा, पर उनके अर्थ सही सही पता नहीं होते है |
अवस्था चार हैं -जाग्रत(conscious) ,स्वप्न ,तुरीय ,सुषुप्ति |
अविद्या - प्राणी की अल्पज्ञता
अंग- वेद के छः अंग है-
शिक्षा, कल्प, व्याकरण,निरुक्त, छंद और ज्योतिष
वेद को पढने की विधि को शिक्षा कहते है |
कल्प उसे कहते है जिसमे सब कर्मों के करने की रीति लिखी हो|
व्याकरण उसे कहते हैं जिसमे शब्दों कि शुद्धता का ज्ञान हो|
निरुक्त उसे कहते हैं जिसमे वेद के कठिन शब्दों का अर्थ निरुक्त सहित लिखा हो |
जिसमे अक्षर -मात्रा वृत्त का ज्ञान हो उसे छंद कहते हैं|
जिसमे भूत ,भविष्य और बर्तमान कल का ज्ञान हो बह ज्योतिष हैं|
आश्रम चार हैं -ब्रह्मचर्य ,गृहस्थ वानप्रस्थ और सन्यास |
आकार चार हैं -पिंडज अर्थात जो देह के साथ उत्पन्न होते हैं|जैसे -मनुष्य , पशु आदि |
अण्डज जो अण्डे से उत्पन्न होते हैं |जैसे -पक्षी ,साँप ,आदि |
स्वेदज जो पानी से उत्पन्न होते हैं |जैसे -चीलर ,ढोल आदि |
उदिभज्ज जो प्रथ्वी को फोड कर उत्पन्न होते हैं |जैसे -पेड ,पौधा , आदि
आभरण बारह हैं -नूपुर ,किंकणी ,हर,चूड़ी ,मुंदरी ,कंकण ,बाजूबंद ,कंठश्री,वेशर ,विरिया ,टीका ,सिरफूल|आदि
उपवेद -
सामवेद का गंधर्ववेद ,अर्थात संगीत शास्त्र |
उपवेद -
सामवेद का गंधर्ववेद ,अर्थात संगीत शास्त्र |
ऋग्वेद का आयुर्वेद अर्थार्त वैद्यिक यजुर्वेद,
अथर्ववेद का शिल्पबिद्या और वास्तु |
ऋतु छः हैं -वसंत ,चैत, वैशाख | ग्रीष्म,ज्येष्ठ ,अषाण | वर्षा श्रावण , भाद्रपद |
शरद ,क्वार ,कार्तिक | हेमंत अगहन ,पूष| शिशिर माघ, फाल्गुन|
कल्प- चारो युगों को चौकणी कहते हैं | और हजार चौकणी का एक कल्प होता है |
गुण तीन है | सैट ,रज ,तम ,राजा के चार गुण है - साम, दाम ,दण्ड भेद|
चतुरंगिणीसेना के चार अंग है |हाथी,घोड़ा ,रथ,पैदल |
तत्व पाँच है प्रथ्वी ,जल ,अग्नि, वायु,आकाश |
त्रिताप तीन प्रकार के दुःख है | आध्यात्मिक ,आदिभौतिक ,आदिदैविक |
त्रिदेव तीन है, ब्रम्हा,बिष्णु, महेश |
त्रिबिध कर्म संचित ,प्रारब्ध ,क्रियमाण |
दिग्पाल पुरब दिशा के इन्द्र,आगन्य के अग्नि,दक्षिण के यम नैऋत्य के निऋत्य,पश्चिम के वरुण,वायव्य के वायु, उत्तर के कुबेर,ईशान के इशान|
rochak tahta gyanwardhak jaankari..
ReplyDeletekeep writing..
please word verification hata dijiye.. tippani dene me taklif hoti hai..
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